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सफलता की संतुष्टि

                                         सफलता की संतुष्टि "यह आवश्यक नहीं कि सर्वाधिक प्रसन्न व्यक्ति प्रत्येक वस्तु (सुविधा) सर्वोत्तम हो, लेकिन यह सुनिश्चित है कि उन्होंने प्रत्येक वस्तु को ही सर्वोत्तम बना दिया है." सफलता का कोई एक सर्वमान्य सूत्र नहीं है यदि होता, तो सभी उसी की नकल करके सफल हो जाते सच बात तो यह है कि जितने व्यक्ति हैं, सफलता के सूत्र भी उतने ही हैं. प्रत्येक की सफलता की राह भिन्न-भिन्न है, तभी तो प्रत्येक की प्रसिद्धि अलग-अलग रूप में परिलक्षित होती है. कोई साधु बनकर सफल होता है, कोई नेता बनकर, कोई खिलाड़ी के रूप में, तो कोई बतौर अभिनेता कोई सीधी राह चलकर सफल होता है, तो कोई पुरानी राह छोड़कर नई राह बनाता है और तब सफल होता है. सफल होने के न केवल तरीके भिन्न-भिन्न हैं, बल्कि, सफलता के अर्थ भी अलग-अलग हैं. कोई धनी बनने पर स्वयं को सफल महसूस करता है, तो कोई यशस्वी बनकर. किसी के लिए कम्पनी खोलना सफलता का पर्याय है, तो किसी के लिए कम्पनी में नौकरी पाना. कुल मिलाकर हर ...

सक्रिय बनना

                                   सक्रिय बनना "घोर निराशा के क्षणों में यह स्मरण रखना चाहिए कि हर अमावस्या के बाद पूर्णिमा सुनिश्चित है; हर काली रात प्रभात की उज्ज्वलता लेकर आती है."       इस जीवन की विविध धाराओं में हम सभी लोग सफर करते हैं. कुछ साहस और आत्मविश्वास से भरकर सफर करते हैं, कुछ लोग आलस्य और प्रमाद में जीते हुए भी जिन्दगी को पूरा व्यतीत कर डालते हैं. आज बहुत सारे लोगों के भीतर अपने आपको सिद्ध  करने में तो तत्परता है, किन्तु अपने कार्यों को अपने कर्तव्यों को पूरा करने में तत्परता बहुत कम दिखलाई देती है. यही बहुत बड़ा कारण है कि जब  एक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को पूरा करने में अपने सामने आए हुए निमित्त और हालात में  सम्मुख उपस्थित परिस्थिति की माँग में तत्परता नहीं दिखाता है तब वह अपनी योग्यताओं  को भी विकसित नहीं कर पाता इस पूरे विश्व में सकारात्मक रूप से कोई बड़ा योगदान नहीं दे पाता. लाखों ऐसे लोग हैं जिनका बहुत बड़ा सकारात्मक योगदान इस विश्व को हो सकता...

ज्ञान को मूर्त रूप प्रदान करना

                                ज्ञान को मूर्त रूप प्रदान करना हमारे महामहिम भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी. जे. अब्दुल कलाम ने अपने पिताजी के उपदेशों का सदैव पालन किया और भ्रष्टाचार से बचते रहे.           भ्रष्टाचार के विरुद्ध उपदेशों से ग्रन्थ भरे पड़े हैं, परन्तु उनका पालन करने वाले उँगलियों पर गिने जा सकते हैं.         महात्मा तेत्सुजैन ने बुद्ध देव के उपदेशों के प्रकाशनार्थ संगृहीत धन को पीड़ितों के सहायतार्थ खर्च कर दिया. उनको पूरा विश्वास था कि उपदेशों को व्यवहार में लाकर हम उपदेशक के प्रति अपने कर्त्तव्य का पालन करते हैं तथा उपदेशों की सार्थकता सिद्ध करते हैं. हमारे राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम उन दिनों रामेश्वरम् के एक स्कूल में पढ़ते थे. एक व्यक्ति इनके पिताश्री से मिलने आया. वह घर पर नहीं थे. उपहार के नाम पर वह एक पैकेट रखकर चला गया. पिताजी ने आकर जब पैकेट देखा, तो बेटे कलाम से उसके बारे में जानकारी प्राप्त की? नाराज होकर उन्होंने इन्हें एक चपत लगाई और...

मातृभूमि की मिट्टी से प्रेम करना सीखिए

                   मातृभूमि की मिट्टी से प्रेम करना सीखिए जापान का एक चित्रकार भगवान बुद्ध के जीवन के अनेक प्रसंगों को अपनी तूलिका से चित्रित करने के उद्देश्य से सारनाथ (वाराणसी के पास) आया हुआ था.           वह भगवान बुद्ध के जीवन के प्रसंगों को दीवालों पर चित्रित करने के काम में दिन भर दत्तचित्त होकर जुटा रहता था. रात के समय बटलोई में कुछ चावल, दाल और आलू डालकर अपने लिए खिचड़ी बना लेता.           एक दिन एक बौद्ध भिक्षु ने उसे एक डिब्बे में से चावल के कुछ दाने निकालकर खिचड़ी में मिलाते देख लिया बौद्ध भिक्षु ने पूछा "क्या चावल के दानों में कोई विशेषता है, जो तुमने चावल-दाल में मिलाए हैं." चित्रकार ने उत्तर दिया, "महाराज, चावल के ये दाने मेरे देश जापान में उत्पन्न हुए हैं. मैं इन्हें अपनी मातृभूमि का परम प्रसाद मानकर प्रतिदिन अपने भोजन में मिला लेता हूँ. इस माध्यम से अपनी मातृभूमि से जुड़ा महसूस करता हूँ." +                   +    ...

असफलता से हारो नहीं

                                               असफलता से हारो नहीं   चला जाता हूँ हँसता-खेलता, मौज-ए-हवादिस से।                       अगर आसानियाँ हों, जिन्दगी दुश्वार हो जाए ॥       एक बार सर विंस्टन चर्चिल से स्कूल में बच्चों ने पूछा- 'सफलता के रहस्य के बारे में आपकी क्या सोच है?' इस प्रश्न पर चर्चिल का जवाब था- सिर्फ आठ शब्द- 'हार न मानो, कभी नहीं, कभी भी नहीं.'       यह बात सौ फीसदी सच है कि हमें कभी भी किसी भी स्थिति में हार नहीं माननी है. असफलता से जो हार मान लेता है वह इंसान ही असफल होता है, किन्तु जो असफलता से नई प्रेरणा लेकर, अनुभव लेकर पुनः आगे प्रयास करता है वह सफलता पा ही लेता है. अंग्रेजी भाषा के ईमपोसिबल शब्द में ही आई एम पोसिबल छुपा हुआ है.             जैन शास्त्र नंदीजी सूत्र में एक दृष्टांत आता है कि एक कोरे घड़े पर पानी की एक बूँद ड...

निष्क्रिय मत बनना

                                         निष्क्रिय मत बनना गति जीवन का नियम है. गतिहीनता व निष्क्रियता मृत्यु के लक्षण हैं. महाभारत, गीता, रामायण आदि ग्रन्थ कर्मशीलता का उपदेश देते हैं. शरीर को कर्म द्वारा मोक्ष का द्वार बनाया जा सकता है. महात्मा गांधी का कथन द्रष्टव्य है कि "सत्याग्रही की कभी हार नहीं होती है."       यदि गम्भीरतापूर्वक विचार किया जाए, तो हमें विदित होगा कि जिन पदार्थों को हम जड़ कहते हैं, वे भी किसी-न-किसी रूप में गतिवान् बने रहते हैं. पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र आदि गतिवान् हैं. एक स्थान पर रखे हुए पदार्थ, खूँटी पर टँगे हुए वस्त्रादि कभी- कभी अपने-आप गिर पड़ते हैं. बात सही है कि जो हमें गतिवान् नहीं दिखाई देता है, वह भी वस्तुतः गतिवान् है. उपनिषद् कहता है कि ब्रह्माण्ड स्थिर प्रतीत होता है, परन्तु वह भी गतिमान् है- "तदेजति तनैजति." संवेदनशीलता की सीमाएं हमारे ज्ञान की भी सीमाएं बनती हैं. वस्तुतः गति सृष्टि का शाश्वत एवं सर्वव्यापी नियम है, तब हम गतिहीन होन...

व्यक्ति की आत्मा ही उसकी सर्वोत्तम शिक्षक है

             व्यक्ति की आत्मा ही उसकी सर्वोत्तम शिक्षक है वह हमारा सर्वोत्तम शिक्षक हो सकता है, जो चैतन्यमंत हो, जो ज्ञानवंत हो, जिसे अनुभव होता हो, जो समझ व समझा सकता हो, जो परिपूर्ण हो, परम विशुद्ध हो, जो हमारे सर्वाधिक निकट हो, जो हर पल हमारा मार्गदर्शक हो, जो हमारा परम सहायक हो.          वह आपकी आत्मा से भिन्न और अन्य कोई हो ही नहीं सकता है, जैन दर्शन का एक प्रमुख वाक्य है, परम सूत्र है कि-                                        "सहजात्मस्वरूप परम गुरु"                                              'अप्पा सो परमप्पा"       अर्थात् आपका सहज आत्मस्वरूप ही परमगुरु है और आत्मा ही परमात्मा है, समण भगवान महावीर ने अपने जीवनकाल में अनेक व्यक्तियों को अज्ञान की नींद से जगाया, उनका भ्रम मिटाया, उन्हें बहुत स...